कृषि विकास से विकसित भारत की ओर: 2047 के लक्ष्य हेतु आवश्यक रणनीतियां
DOI:
https://doi.org/10.59828/ijmrast.v4i8.305Keywords:
जैविक खेती, फसल विविधीकरण, खाद्य सुरक्षा, आत्म निर्भर कृषिAbstract
भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। देश 2047 में अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी की ओर पूरे आत्मविश्वास के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारी साँझा राष्ट्रीय आकांक्षा एक विकसित समावेशी और सशक्त राष्ट्र “ विकसित भारत ’’ की परिकल्पना है। बदलाव के इस दौर में कृषि क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका होगी क्योंकि रोटी और आजीविका दोनों के लिए हम इस पर निर्भर हैं। यह क्षेत्र भारत की सभ्यता और संस्कृति में बसा है तथा भारतीय अर्थव्यवस्था का मेरुदंड है ।
कृषि क्षेत्र को पूर्णत विकसित किए बिना हम 2047 तक भारत को विकसित नहीं बना सकते। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए कई महत्वपूर्ण घटकों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। संसाधनों के कुशल उपयोग जैविक खेती फसल विविधिकरण और लचीलेपन जैसे प्रमुख कारकों के साथ खाद्य सुरक्षा पर्यावरणीय स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सतत कृषि पद्धतियां महत्वपूर्ण बन जाती हैं। इन सभी को अपनाकर हम आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। इससे किसानों का सशक्तिकरण होगा, प्रथाएं आधुनिक बनेगी,पर्यावरण की रक्षा हो सकेगी, तथा एक शुद्ध प्रौद्योगिकी सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र का अविर्भाव होगा जो ग्रामीण भारत में समृद्धि लाकर विकसित भारत की संकल्पना को साकार करेगा।
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