ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में भारतीय मुस्लिम महिलाओं की स्थिति: परंपरा से आधुनिकता की ओर
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https://doi.org/10.61778/ijmrast.v3i11.199Keywords:
भारतीय मुस्लिम महिला, परंपरा, आधुनिकता, समाजशास्त्र, शिक्षा, सशक्तिकरण, शरीअत, सामाजिक परिवर्तन.Abstract
भारतीय समाज की संरचना में धर्म, संस्कृति और परंपरा का गहरा प्रभाव सदैव रहा है। मुस्लिम समाज, जो भारत की बहुलतावादी सांस्कृतिक धारा का एक महत्वपूर्ण अंग है, उसमें महिलाओं की स्थिति सदियों से परिवर्तनशील रही है। इस शोध में भारतीय मुस्लिम महिलाओं की स्थिति का विश्लेषण ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य से किया गया है — इस्लाम के आगमन से लेकर आधुनिक युग तक।
कुरआन और हदीस में नारी को समान अधिकार और सम्मान प्रदान किए जाने के बावजूद, सामाजिक संरचना और पितृसत्तात्मक परंपराओं ने उनके अधिकारों के प्रयोग को सीमित किया। औपनिवेशिक काल में सर सैयद अहमद ख़ान, बेगम रुकैया सखावत हुसैन, शाहजहाँ बेगम आदि सुधारकों ने मुस्लिम महिला शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया। स्वतंत्रता के पश्चात संविधान, शिक्षा और विधिक सुधारों ने मुस्लिम महिलाओं को नये अवसर प्रदान किए।
आधुनिक युग में तकनीकी प्रगति, शिक्षा, और मीडिया ने मुस्लिम महिलाओं के जीवन में गहन परिवर्तन लाए हैं। अब वे परंपरा को त्यागे बिना आधुनिकता को अपनाने की दिशा में अग्रसर हैं। यह शोध समाजशास्त्रीय दृष्टि से दर्शाता है कि मुस्लिम महिला का सशक्तिकरण परंपरा और आधुनिकता के समन्वय से संभव है।
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